जाने आखिर क्यों पीएम मोदी अपने पिता का कभी जिक्र नहीं करते
इसमें कोई शक नहीं कि पीएम बनने के बाद मोदी जी ने भारत देश में कई अच्छे परिवर्तन किए है। हालांकि पीएम बनने से पहले उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में देश की सेवा भी की थी। मगर क्या आप जानते है कि आखिर क्यों पीएम मोदी अपने पिता के बारे में कभी बात नहीं करते। आखिर क्यों वह सार्वजनिक स्थानों पर भी कभी अपने पिता का जिक्र नहीं करते। अब नरेंद्र मोदी जी की माता जी को तो कई बार आपने उनके साथ देखा होगा, लेकिन मोदी जी के पिता के बारे में बहुत कम लोग ही जानते है। बता दे कि मोदी जी के पिता का नाम दामोदरदास मोदी था। जी हां मोदी जी के पिता अपना घर चलाने के लिए रेलवे स्टेशन पर ही चाय बेचने का काम करते थे।

पीएम मोदी अपने पिता..
वैसे भी राजनीती में आने से पहले पीएम मोदी जी भी अपने पिता की तरह ही चाय बेचने का काम करते थे। हालांकि आपको जान कर हैरानी होगी कि मोदी जी का परिवार इतना गरीब था कि वह चाय बेच कर मुश्किल से अपने घर का गुजारा कर पाते थे। यहाँ तक कि पहले के समय में तस्वीरें खींचने का ज्यादा चलन नहीं था। जिसके कारण मोदी जी की अपने पिता के साथ एक भी तस्वीर मौजूद नहीं है। इसके इलावा अगर खबरों की माने तो ऐसा कहा जाता है कि एक दिन अचानक मोदी जी के पिता को हार्ट अटैक आ गया और इलाज न हो पाने के कारण उनकी मृत्यु हो गई।
केवल इतना ही नहीं इसके इलावा जब मोदी जी के पिता को अटैक आया तब वह उनके साथ नहीं थे और इस बात का उन्हें आज तक अफ़सोस है। यानि अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो वह अपने पिता के अंतिम समय में उनके साथ नहीं थे। शायद यही वजह है कि मोदी जी आज तक किसी सार्वजनिक जगह या किसी मंच पर अपने पिता का जिक्र नहीं करते। हालांकि पिता की मृत्यु के बाद मोदी जी अपनी माँ का बेहद ख्याल रखते है और उनकी सेवा करते है। मगर अपने पिता के जाने का गम वह आज तक नहीं भुला पाएं है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि पीएम मोदी अपने पिता से बेहद प्यार करते थे और उन्हें आज भी याद करते है।
यूँ तो मोदी जी के पिता का निधन हुए काफी साल बीत चुके है, लेकिन मोदी जी के दिल में आज भी उनके पिता की यादें शामिल है।
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hello everyone, my name is Rajni Goyal. i am a writer but on the other side i love music. to be very frank i also even don’t know what i want to do in my life. लेकिन अगर अपनी भाषा मैं कहूं तो…. भटकती हुई मुसाफिर हूँ, मंजिल की तलाश है, जहाँ मंजिल दिख जाएँ वही लिखा हमारी किस्मत का असली आगाज है।



